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पैरों में कमजोरी, सुन्नता और कंपन की समस्या से बचाव के उपाय

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Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को प्रभावित कर सकती हैं ये समस्याएं, आयुर्वेद में असगंध और आमलकी रसायन को माना गया है उपयोगी

पैरों में कमजोरी, पिंडलियों में दर्द, चलते समय जल्दी थकान महसूस होना, हाथ-पैरों में सुन्नता और कंपन जैसी समस्याओं को अक्सर लोग बढ़ती उम्र से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, ये परेशानियां केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चे, युवा और प्रौढ़ भी इनसे प्रभावित हो सकते हैं। शरीर में कमजोरी और अत्यधिक दुबलापन भी कई बार चिंता का कारण बन जाता है।

आयुर्वेद में शरीर की शक्ति और पोषण को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है। इनमें असगंध और आमलकी रसायन का विशेष स्थान है। इन दोनों के मिश्रण को पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति में उपयोगी माना जाता है।

असगंध (अश्वगंधा)

असगंध को अश्वगंधा के नाम से भी जाना जाता है। इसका स्वाद कसैला और कुछ कड़वा होता है। औषधीय उपयोग में मुख्य रूप से इसकी जड़ का प्रयोग किया जाता है। इसकी विशिष्ट गंध के कारण इसे अश्वगंधा नाम मिलने की मान्यता है। यह जड़ी-बूटी बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इसका उपयोग चूर्ण के रूप में किया जाता है। बाजार से तैयार चूर्ण लिया जा सकता है अथवा इसकी सूखी जड़ को पिसवाकर बारीक चूर्ण तैयार कराया जा सकता है।

आमलकी रसायन

आमलकी रसायन आंवले से तैयार किया जाने वाला आयुर्वेदिक उत्पाद है। इसे बनाने के लिए आंवले के चूर्ण में ताजा आंवले का रस मिलाकर उसे सुखाया जाता है। इसके बाद दोबारा रस की भावना देकर सुखाने की प्रक्रिया दोहराई जाती है। परंपरागत विधि में इस प्रक्रिया को 11 बार किया जाता है। इस प्रकार तैयार चूर्ण को आमलकी रसायन कहा जाता है। इसे घर पर तैयार करने के बजाय किसी प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक औषधि निर्माता कंपनी का प्रमाणित उत्पाद लेना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

दोनों चूर्ण के मिश्रण का पारंपरिक प्रयोग

पारंपरिक आयुर्वेदिक नुस्खे के अनुसार असगंध और आमलकी रसायन के चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर किसी साफ और वायुरोधी डिब्बे या शीशी में सुरक्षित रखा जाता है। इसके सेवन की मात्रा और अवधि व्यक्ति की उम्र, शारीरिक स्थिति तथा स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के अनुसार प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक से निर्धारित करानी चाहिए।

परंपरागत रूप से इसे शहद, दूध अथवा मिश्री की चाशनी के साथ लेने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, मधुमेह से पीड़ित लोगों को शहद और मिश्री की चाशनी से परहेज करना चाहिए। उन्हें भी किसी चिकित्सक की सलाह के बिना इसका सेवन शुरू नहीं करना चाहिए।

खानपान और दिनचर्या का भी रखें ध्यान

शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं और अपनी भूख तथा जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में भोजन करें। अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों और अनियमित दिनचर्या से बचना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

विशेषज्ञ की सलाह जरूरी

पैरों में लगातार कमजोरी, सुन्नता, कंपन, पिंडलियों में दर्द या चलते समय थकान होने पर केवल घरेलू अथवा आयुर्वेदिक नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इन लक्षणों के पीछे विटामिन की कमी, मधुमेह, नसों से जुड़ी समस्या या अन्य स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं। इसलिए सही कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का नियमित सेवन चिकित्सक की सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए।

प्रस्तुति: डॉ. (वैद्य) दीपक कुमार
आदर्श आयुर्वेदिक फार्मेसी, कनखल, हरिद्वार

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