यदि होर्मुज को बंद करने की कोशिश की गई, तो ईरान अमेरिकी जहाजों को बनाएगा निशाना- रेजाई
Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi
अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, बंदरगाहों की नाकेबंदी से बढ़ा संकट
तेहरान। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ा है, वहीं ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को सीधी चेतावनी दे दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं, जिससे किसी भी देश के जहाजों का ईरानी बंदरगाहों तक आना-जाना लगभग ठप हो गया है। इस कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
इस घटनाक्रम पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश की गई, तो ईरान अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरानी मिसाइलें अमेरिकी नौसेना के जहाजों को आसानी से तबाह कर सकती हैं।
रेजाई ने अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अमेरिका खुद को इस क्षेत्र का “पुलिस” बनाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका जमीनी हमला करता है, तो ईरान इसका जवाब और अधिक आक्रामक तरीके से देगा। उन्होंने यहां तक दावा किया कि ईरान अमेरिकी सैनिकों को बंदी बनाकर बदले में भारी कीमत वसूल सकता है।
इस बीच, बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात वैश्विक शांति और मानवता के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।
वहीं, पोप लियो ने भी शांति की अपील करते हुए कहा कि दुनिया को अब युद्ध और हिंसा से दूर हटकर प्रेम, संवाद और न्याय का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघर्ष से होने वाला विनाश और मानवीय पीड़ा अब और स्वीकार्य नहीं है।

