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जानिए, रिफाइंड तेल शरीर के लिए क्यों हानिकारक है ?

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Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

रिफाइंड तेल के बारे में आज से 50 साल पहले तो कोई नहीं जानता था, ये पिछले 20-25 वर्षों से हमारे देश में आया है। कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं। इन्होंने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जम कर प्रचार किया, लेकिन लोगों ने माना नहीं इनकी बात को, तब इन्होंने डॉक्टरों के माध्यम से कहलवाना शुरू किया। डॉक्टरों ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइंड तेल लिखना शुरू किया कि तेल खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल, सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ, अब क्यों, आप सब समझदार हैं समझ सकते हैं।

रिफाइंड तेल कैसे बनता है?

ये रिफाइंड तेल बनता कैसे है? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ जायेंगे। किसी भी तेल को रिफाइंड करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइंड करने में ये संख्या 12-13 हो जाती है। ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं। प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता। भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ, जिसे हम ओरगेनिक कहते हैं। तेल को साफ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब ओरगेनिक हैं और इनओरगेनिक केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका कॉम्बिनेशन जहर के तरफ ही ले जाता है। इसलिए रिफाइंड तेल, डबल रिफाइंड तेल गलती से भी न खाएं।

रिफाइंड तेल ना खाएं तो क्या खाएं?

फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं? तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, तीसी का, या नारियल का। अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है। हम लोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है। तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका आरेगेनिक कॉन्टेक्ट है प्रोटीन के लिए।

4-5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका फैटी एसिड गायब! अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी और ऐसे रिफाइंड तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात, पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि-आदि। जिन-जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइंड तेल खाया जाता है उन्हीं घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइंड तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ हार्ट ब्लोकेज और हाटै अटैक की समस्याएं हो रही है।

जब सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो एम्स के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इस पर काम किया और उन डॉक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है। उन्होंने कहा “तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइंड में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ? मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है एचडीएल, ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब। तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका एचडीएल अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे।

अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है। मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में, वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखों-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है। 7-8 वर्ष पहले भारत में ऐसा भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दूसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन गेट समझौता और डब्ल्यूटीओ के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है। भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइंड तेल और डबल रिफाइंड तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है। और जो पाम तेल खायेगा, मैं यह कहने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा। क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी डिसोल्व नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में डिसोल्व नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है।

Dr. (Vaidhya) Deepak Kumar
Adarsh Ayurvedic Pharmacy
Kankhal Hardwar
Email:- aapdeepak.hdr@gmail.com
Contact: – 9897902760

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