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महानिर्वाणी अखाड़े में ​विजय दशमी पर हुआ शस्त्र पूजन

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Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

संतों ने लिया सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प

हरिद्वार। विजयदशमी के पावन पर्व पर मंगलवार को श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन किया गया। अखाड़े के इष्ट देव सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश के साथ प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों का पूजन कर संतों ने सनातन धर्म, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की रक्षा का संकल्प लिया। पंड़ित अवधेश शर्मा के आचार्यत्व में पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस दौरान अखाड़े की प्राचीन परंपराओं और नागा संन्यासियों के त्याग एवं बलिदान का स्मरण किया गया।

श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने देशवासियों को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शस्त्र पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। सनातन परंपरा में शास्त्र ज्ञान और शस्त्र शक्ति, दोनों का विशेष महत्व रहा है।

उन्होंने कहा कि भगवान आदि शंकराचार्य ने शास्त्र के साथ शस्त्र की परंपरा को भी प्रतिष्ठित किया। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए नागा संन्यासियों ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र के साथ शस्त्र धारण किए और आक्रांताओं का मुकाबला किया। धर्म और धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए नागा संन्यासियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनका त्याग, साहस और समर्पण सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है।

श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी का इतिहास गौरवशाली रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अखाड़े के सैकड़ों नागा संन्यासियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका त्याग और धर्म के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। अखाड़ों की परंपरा केवल साधना और आध्यात्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं रही, बल्कि धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है। शस्त्र पूजन की परंपरा हमें अपने धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर महंत कैलाश भारती, श्रीमहंत मनोज गिरि, महंत विनोद गिरि उर्फ हनुमान बाबा, स्वामी ज्ञान भारती, स्वामी हरिशंकर गिरि, स्वामी किशनपुरी और स्वामी कुंदन पुरी महाराज सहित अखाड़े के अनेक संत-महंत उपस्थित रहे। सभी ने परंपरानुसार शस्त्र पूजन में भाग लेकर सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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