ब्लड शुगर कंट्रोल करने में कितना असरदार है करेला जूस? जानिए विशेषज्ञों की राय
Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi
ब्लड शुगर की समस्या आज तेजी से बढ़ रही है और यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। खराब जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाइयों के साथ स्वस्थ आहार और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन भी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इसी कड़ी में करेला जूस को एक लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है। कई अध्ययनों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में यह दावा किया गया है कि करेला में मौजूद पोषक तत्व शरीर में ग्लूकोज के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसका सेवन चिकित्सकीय सलाह के साथ ही करना चाहिए।
शुगर कंट्रोल में कैसे मदद करता है करेला जूस?
करेला में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में इंसुलिन की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इसमें मौजूद चारेंटिन और पॉलीपेप्टाइड-पी जैसे यौगिक रक्त में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के बीच करेला जूस को काफी उपयोगी माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, करेला अग्न्याशय (पैंक्रियाज) के कार्य को भी समर्थन दे सकता है, जिससे शरीर में इंसुलिन उत्पादन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में सूजन को कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं।
सेवन से पहले बरतें सावधानी
हालांकि करेला जूस के कई संभावित लाभ बताए जाते हैं, लेकिन इसका अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेने पर ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से काफी नीचे जा सकता है। खासतौर पर वे लोग जो पहले से डायबिटीज की दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, उन्हें करेला जूस को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक उपाय को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय परामर्श के साथ ही डायबिटीज को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्टों और उपलब्ध शोध के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।

