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उत्तराखण्ड में मानसून का असर: देहरादून और नैनीताल सहित 8 जिलों में बारिश, जानें साप्ताहिक मौसम का पूरा हाल

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मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून में 25 अप्रैल तक मौसम पूर्वानुमान जारी करते हुए एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्र में बरसात और हिमपात की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार 20 अप्रैल को उत्तराखंड राज्य के देहरादून, टिहरी, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा / गर्जन के साथ वर्षा / बर्फबारी (4000m व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना है। तथा राज्य के शेष जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। जबकि 21 अप्रैल को उत्तरकाशी, चमोली एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा / गर्जन के साथ वर्षा /बर्फबारी (4000m व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना है । तथा राज्य के शेष जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि 22 व 23अप्रैल को राज्य के सभी जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है ।
तथा 24 अप्रैल को राज्य के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा /गर्जन के साथ वर्षा / बर्फबारी (4000m व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना व राज्य के शेष जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। तथा 25 अप्रैल को उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा / गर्जन के साथ वर्षा / बर्फबारी (4000m व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना व राज्य के शेष जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है ।

मौसम विभाग ने नई तकनीक की विकसित

भारत में चक्रवात, बाढ़, हीटवेव, सूखा और भूस्खलन जैसी बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मल्टी-हैज़र्ड अर्ली वार्निंग डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (MHEW-DSS) विकसित किया है, जो मौसम पूर्वानुमान को आधुनिक, डिजिटल और एकीकृत रूप में बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
जनवरी 2024 में शुरू की गई यह प्रणाली देश में मौसम संबंधी सूचनाओं को तेज, सटीक और उपयोगी बनाने का काम कर रही है। इसके माध्यम से अब भारत और आसपास के क्षेत्रों की लगभग 80% आबादी तक स्थान-विशिष्ट और प्रभाव-आधारित चेतावनियां पहुंच रही हैं। इससे पूर्वानुमान तैयार करने का समय लगभग 50% तक कम हुआ है, जबकि सटीकता में करीब 30% तक सुधार दर्ज किया गया है।
मिशन मौसम के तहत विकसित यह उन्नत प्रणाली GIS मैप, सैटेलाइट और रडार डेटा जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग करती है। इसके जरिए मौसम वैज्ञानिक तेजी से डेटा एकत्र कर विश्लेषण करते हैं और उसे सरल रूप में आम लोगों तक पहुंचाते हैं। साथ ही, यह प्रणाली किसानों, मछुआरों, परिवहन, ऊर्जा और पर्यटन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष चेतावनियां भी जारी करती है, जिससे समय रहते तैयारी संभव हो पाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने से चक्रवात के लैंडफॉल (तट पर पहुंचने) के पूर्वानुमान में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि 1999 से 2024 के बीच आपदा के समय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की लागत एक-तिहाई तक कम हो गई है।
भारत जैसे देश में, जहां 75% से अधिक जिले कई तरह के जलवायु खतरों से प्रभावित हैं, MHEW-DSS जैसी प्रणाली आपदा प्रबंधन को मजबूत करने, जन-हानि और आर्थिक नुकसान को कम करने तथा समय पर चेतावनी देकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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