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उच्च शिक्षा विभाग में उत्तर-पुस्तिकाओं का होगा डिजिटल मूल्यांकन- डाॅ. धन सिंह रावत

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ऑन-स्क्रीन मार्किंग से परीक्षाओं के मूल्यांकन में आयेगी पारदर्शिता

डिजिटल मूल्यांकन से समय पर घोषित होंगे परीक्षा परिणाम

Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

देहरादून- उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों में अब उत्तर-पुस्तिकाओं का ऑनस्क्रीन डिजिटल मूल्यांकन (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) किया जायेगा। जिससे परीक्षा मूल्यांकन अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित होगा। ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से परीक्षा परिणाम समय पर घोषित हो सकेंगे, जिसका सीधा लाभ छात्र-छात्राओं को मिलेगा। शासन स्तर से विश्वविद्यालयों में ऑनस्क्रीन डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को वर्तमान सेमेस्टर (जनवरी 2026) से लागू करने के निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य विश्वविद्यालयों एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों की परीक्षा प्रणाली में अहम सुधार कर उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। अब विश्वविद्यालयों में सभी प्रकार की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के तहत जांची जायेगी, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित हो सकेगी और भौतिक परिवहन के खर्चे में कमी के साथ ही समय पर परीक्षा परिणाम घोषित हो सकेंगे।

विभागीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालयों में पारम्परिक व भौतिक मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी, पुनमूल्यांकन में देरी व उत्तर पुस्तिकाओं के समिति संरक्षण जैसी समस्याएं को देखते हुये यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों को ऑनस्क्रीन डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के माध्यम से वर्तमान सेमेस्टर (जनवरी 2026) से परीक्षाओं का मूल्यांकन को शासन स्तर से निर्देश जारी कर दिये गये हैं।

डाॅ. रावत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों पर परीक्षा कार्यों का दबाव बढ़ा है, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से अब आपसी समन्वय की पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक होगी, जिससे मैन्युअल हस्तक्षेप कम हो जायेगा। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन के डिजिटलीकरण से शिक्षकों की भागीदारी और बढ़ जायेगी और वह अपने-अपने शिक्षण संस्थानों से ही मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे महाविद्यालयों व विश्वविद्यालय परिसरों में नियमित पढ़ाई व्यवस्था बाधित नहीं होगी।

इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल रिकाॅर्ड भी सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में छात्रों के पुनर्मूल्यांकन संबंधी समस्याओं का भी समाधान आसानी से हो सकेगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को सरल एवं व्यवहारिक बनाने को विश्वविद्यालयों को आवश्यक तकनीकी संसाधन एवं प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं ताकि नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

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