Search for:
  • Home/
  • Breaking News/
  • ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म

ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म

Listen to this article

Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

पंतनगर विश्वविद्यालय और एनडीआरआई करनाल के वैज्ञानिकों की संयुक्त मेहनत रंग लाई

पंतनगर। उत्तराखंड की देशी बद्री गोवंश नस्ल के संरक्षण और उसके आनुवंशिक सुधार की दिशा में पंतनगर विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ओपीयू-आईवीएफ तकनीक के माध्यम से तैयार उच्च गुणवत्ता वाले बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया, जिसके बाद साहीवाल गाय ने बद्री नस्ल की मादा बछिया को जन्म दिया है।

अकादमिक डेयरी फार्म में इस बछिया का जन्म 11 सितंबर की तड़के 3:10 बजे हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार यह उपलब्धि बद्री गोवंश के संरक्षण और बेहतर आनुवंशिक गुणों वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा एक क्रॉसब्रेड गाय के भी अगले पांच से सात दिनों में बद्री बछड़े को जन्म देने की उम्मीद है। यह शोध पंतनगर विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा स्त्री एवं प्रसूति विज्ञान विभाग और एनडीआरआई करनाल के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया। शोध कार्य पिछले तीन वर्षों से उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी द्वारा वित्त पोषित परियोजना के तहत चल रहा था।

ऐसे तैयार हुआ बद्री भ्रूण

शोध के दौरान विश्वविद्यालय के अकादमिक डेयरी फार्म स्थित बद्री पशु इकाई से बेहतर आनुवंशिक गुणों वाली बद्री गायों का चयन किया गया। ओवम पिक-अप (ओपीयू) तकनीक से इन गायों से अंडाणु प्राप्त किए गए। प्रयोगशाला में 24 घंटे तक परिपक्व करने के बाद उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले बद्री सांड के वीर्य से इनका इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) कराया गया।

निषेचित अंडाणुओं को नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में सात दिनों तक विकसित किया गया, जिसके बाद बद्री भ्रूण तैयार हुए। इन भ्रूणों को साहीवाल, क्रॉसब्रेड और बद्री गायों के गर्भाशय में वैज्ञानिक विधि से प्रत्यारोपित किया गया। इसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप साहीवाल गाय ने बद्री नस्ल की मादा बछिया को जन्म दिया।

बद्री गाय की क्लोनिंग पर भी काम

परियोजना के तहत अधिक दूध उत्पादन क्षमता वाली श्रेष्ठ बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम चल रहा है। वैज्ञानिक टीम अब तक तीन से चार चरणों में क्लोन बद्री भ्रूण तैयार करने में सफलता हासिल कर चुकी है। भविष्य में ओपीयू-आईवीएफ और क्लोनिंग तकनीक से तैयार अधिक संख्या में भ्रूणों को विभिन्न गायों में प्रत्यारोपित करने की योजना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे बेहतर आनुवंशिक गुणों वाली बद्री गायों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी और उत्तराखंड की इस महत्वपूर्ण देशी नस्ल के संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार को गति मिलेगी।

कुलपति ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने अकादमिक डेयरी फार्म पहुंचकर वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार की नीतियों के अनुरूप महत्वपूर्ण पशु एवं फसल नस्लों के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बद्री गाय उत्तराखंड की एकमात्र पंजीकृत गोवंश नस्ल है, इसलिए इसके संरक्षण और आनुवंशिक सुधार का विशेष महत्व है। इस प्रकार के शोध से भविष्य में उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

शोध टीम में पंतनगर विश्वविद्यालय के डॉ. शिव प्रसाद, डॉ. सुनील कुमार और डॉ. मृदुला शर्मा तथा एनडीआरआई करनाल के डॉ. नरेश एल. सालोकर और डॉ. एम.के. सिंह शामिल रहे। उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के निदेशक डॉ. संजय शर्मा भी परियोजना से जुड़े रहे। कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज के डीन डॉ. डी. कुमार ने भी वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी।

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required