अचानक खड़े होते ही चक्कर आना? यह कमजोरी नहीं, हो सकता है किसी गंभीर बीमारी का संकेत
Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi
अक्सर लोग सोकर या लंबे समय तक बैठने के बाद जैसे ही अचानक खड़े होते हैं, तो आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है या सिर घूमने लगता है। अधिकांश लोग इसे कमजोरी, थकान या नींद पूरी न होने का असर मानकर टाल देते हैं लेकिन चिकित्सकीय दृष्टि से यह स्थिति केवल सामान्य नहीं, बल्कि शरीर के भीतर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है। मेडिकल भाषा में इसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है, जिसमें खड़े होते ही रक्तचाप अचानक गिर जाता है।
जब व्यक्ति अचानक खड़ा होता है, तो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से रक्त तेजी से पैरों की ओर चला जाता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर का नर्वस सिस्टम तुरंत प्रतिक्रिया देता है—हृदय की धड़कन बढ़ाकर और रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बनाए रखता है। लेकिन जब यह तंत्र सही ढंग से काम नहीं करता, तो कुछ क्षणों के लिए मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे चक्कर, धुंधलापन या बेहोशी जैसी स्थिति बन जाती है।
अचानक चक्कर आने के पीछे क्या हो सकते हैं चिकित्सीय कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार खड़े होने पर चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें सबसे आम कारण डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी है। इसके अलावा एनीमिया (खून की कमी), विटामिन B12 की कमी, लो ब्लड शुगर, या लंबे समय से ली जा रही ब्लड प्रेशर की दवाएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। कुछ मामलों में हृदय संबंधी समस्याएं, हार्ट वाल्व की खराबी या नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियां भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकती हैं।
क्या यह दिल या नर्वस सिस्टम की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है?
डॉक्टरों का कहना है कि यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। बार-बार चक्कर आना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर का बैरोरिफ्लेक्स सिस्टम, जो रक्तचाप को नियंत्रित करता है, सही से काम नहीं कर रहा।
यह स्थिति दिल की धड़कन में अनियमितता, नसों की क्षति या पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी की शुरुआती चेतावनी भी हो सकती है। खासतौर पर बुजुर्गों में इसके कारण अचानक गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे गंभीर चोट या जान का जोखिम भी हो सकता है।
इस समस्या से बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव बेहद कारगर साबित हो सकते हैं—
धीरे उठें: बिस्तर से उठते समय पहले कुछ देर बैठें, फिर धीरे-धीरे खड़े हों
पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर शरीर को हाइड्रेट रखें, जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रोलाइट्स लें
नमक का संतुलन: डॉक्टर की सलाह से आहार में नमक की मात्रा संतुलित रखें
नियमित व्यायाम: पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करें, जिससे रक्त संचार बेहतर हो
शरीर के संकेतों को हल्के में न लें
अचानक आने वाले चक्कर को मामूली समझकर नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। यदि सावधानियां बरतने के बावजूद चक्कर आना बंद न हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। चिकित्सक जरूरत पड़ने पर टिल्ट टेबल टेस्ट, ब्लड टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। याद रखें, शरीर समय-समय पर संकेत देता है—उन्हें समझना और समय पर कदम उठाना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

