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50 के नोटों से सजी कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र

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हरिद्वार, 23 जुलाई। श्रावण कांवड़ मेले में शिवभक्त लगातार हरिद्वार पहुंच रहे हैं। 22 जुलाई से शुरू हुए कांवड़ मेले के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे। हरकी और आसपास के सभी घाटों पर पैरों में घुंघरू बांधे बम बोल के जयकारे लगाते शिवभक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है। हालांकि मंगलवार से पंचक लगने की वजह से कांवड़ उठाने वालों की संख्या कम रही। शास्त्रों में पंचक में बांस की खरीदारी को निषिद्ध माना गया है । चूंकि कांवड़ बांस से बनायी जाती है। इसलिए पंचक मानने वाले कांवड़िएं पंचकों में कांवड़ नहीं उठाते हैं।

28 जुलाई को पंचक समाप्ति के बाद कांवड़ लेकर अपने अभिष्ट शिवालयों की और लौटने वाले शिवभक्तों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। लेकिन पंचक नहीं मानने वाले शिवभक्त कांवड़ों में गंगाजल भरकर अपने गंतव्यों की रवाना हो रहे हैं। कांवड़िए पटरी मार्ग से निंरतर वापसी कर रहे हैं। इस दौरान कांवड़ मेले के रंग भी दिखने लगे हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुई नोटों से सजी कांवड़ सबके आकर्षण का केंद्र रही। दिल्ली के कांवड़ियों का एक समूह 50 के नोटो से सजी कांवड़ मे गंगाजल भरकर दिल्ली के लिए रवाना हुए।

कांवड़िए मोनू ने बताया कि वे हर वर्ष कांवड़ लेने हरिद्वार आते हैं। पिछले वर्ष वे 20 के नोटों से सजी कांवड़ लेकर गए थे। जिसमें कुल 36 हजार रूपए लगे थे। इस बार 50 रूपए के नोटों से कांवड़ को सजाकर ले जा रहे हैं। जिसमें 55 हजार रूपए लगे हैं। उन्होंने बताया कि कांवड़ मे लगे नोटों को भंडारे व अन्य धार्मिक आयोजनों पर खर्च करेंगे।

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