Search for:
  • Home/
  • Breaking News/
  • नीट यूजी फर्जी प्रमाणपत्र मामले में दो गिरफ्तार

नीट यूजी फर्जी प्रमाणपत्र मामले में दो गिरफ्तार

Listen to this article

Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

45 लाख में हुआ था सौदा

गिरोह के सरगना रूपेश पंडित और अरविंद कुमार गिरफ्तार

12 संदिग्धों की जांच जारी, 350 से अधिक संदिग्ध प्रमाणपत्रों की भी जांच

देहरादून। उत्तराखंड में नीट यूजी काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिला लेने के मामले में एसआईटी ने पहली दो गिरफ्तारियां की हैं। देहरादून पुलिस और एसआईटी ने मामले में कथित गिरोह के सरगना रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों से रायपुर थाने में पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

मामले की जांच के लिए गठित 10 सदस्यीय एसआईटी मंगलवार को हरिद्वार पहुंची और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के नाम पर बनाए गए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। इसी दौरान दो आरोपियों को पूछताछ के लिए रायपुर थाने बुलाया गया था, जहां पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

45 लाख रुपये में हुआ था फर्जी प्रमाणपत्र का सौदा

देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसआईटी और पुलिस अधिकारियों ने मामले में अब तक हुई जांच का खुलासा किया। एसआईटी के अनुसार फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के लिए 45 लाख रुपये में सौदा हुआ था। इसमें तीन लोगों की ओर से 20 लाख रुपये एडवांस दिए जाने की बात सामने आई है।

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी अरविंद कुमार ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने अपनी बेटी के लिए फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने के एवज में 20 लाख रुपये दिए थे। उसकी बेटी के खिलाफ भी रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार मामले में 12 अन्य लोग अभी संदिग्ध हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में फर्जीवाड़े का आरोप

जांच का केंद्र नीट यूजी काउंसलिंग में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य स्थानीय आरक्षण कोटे का लाभ लेने के लिए कथित तौर पर तैयार किए गए फर्जी प्रमाणपत्र हैं। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने मृत या अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर फर्जी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराकर राज्य कोटे की आरक्षित एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर प्रवेश हासिल किया।

जांच के दौरान ऐसे मामले भी सामने आने का दावा किया गया है, जिनमें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज एक ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम और कथित जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग अभ्यर्थियों ने स्वयं को उनका पोता या आश्रित बताते हुए आरक्षण का लाभ लिया। बताया गया है कि संबंधित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वास्तविक परिवारों की ओर से ऐसे किसी लाभ का दावा नहीं किया गया था। जांच में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों पर एआई से तैयार तस्वीरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। इससे पूरे मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के तरीके को लेकर जांच एजेंसियों का फोकस और बढ़ गया है।

350 से अधिक डोमिसाइल और आरक्षित श्रेणी के प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में

मामले को लेकर व्हिसलब्लोअर और पत्रकारों की ओर से स्वास्थ्य मंत्री तथा प्रशासन को 350 से अधिक दस्तावेज सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें डोमिसाइल यानी निवास प्रमाणपत्र के साथ-साथ एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस जैसी आरक्षित श्रेणियों से जुड़े प्रमाणपत्र भी शामिल बताए गए हैं। इन दस्तावेजों में कई प्रमाणपत्रों को संदिग्ध बताया गया है। एसआईटी अब इन प्रमाणपत्रों की सत्यता, उनके जारी होने की प्रक्रिया और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

एसपी ग्रामीण के नेतृत्व में गठित है एसआईटी

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने एसपी ग्रामीण जया बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया है। एसआईटी संबंधित एसडीएम और पटवारी कार्यालयों के रिकॉर्ड की जांच करने के साथ प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी सरकारी प्रक्रिया को भी खंगाल रही है। पुलिस और प्रशासन की जांच का दायरा संदिग्ध प्रमाणपत्रों को सत्यापित करने से लेकर उनके आधार पर लिए गए दाखिलों और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका तक फैला हुआ है। जांच के आधार पर संदिग्ध प्रमाणपत्रों को निरस्त करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required