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श्रावण की भक्ति में सजा श्री तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर

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Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ

हरिद्वार। कनखल स्थित श्री तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर के 34वें श्रावण मास वार्षिकोत्सव महोत्सव के तहत बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा के शुभारंभ अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में पहुंचकर कथा का श्रवण किया और भगवान शिव एवं श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः प्रायश्चित स्नान, श्री गणेश पूजन एवं देव पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में सैकड़ों महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए कलश लेकर आगे बढ़े। कलश यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।

इस अवसर पर श्री तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर के परमाध्यक्ष श्रीमहंत त्रिवेणी दास महाराज ने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव का पूजन, जलाभिषेक और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर धर्म एवं आध्यात्मिक ज्ञान को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।

कथा व्यास आचार्य दीपक भाई जोशी ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए भागवत महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का भाव जागृत होता है।

उन्होंने प्रथम दिन की कथा में भागवत महात्म्य, भगवान के प्रति भक्ति की महत्ता तथा सत्संग के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय ईश्वर के नाम का स्मरण और सत्कर्म करते रहना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान की कथा का श्रवण मन को शांति प्रदान करता है और जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देता है। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का स्मरण करने, धर्म के मार्ग पर चलने तथा जरूरतमंदों की सेवा करने का संदेश दिया।

कथा के मुख्य यजमान श्रीमती मीना अग्रवाल एवं सत्यप्रकाश अग्रवाल, श्रीमती मिथलेश लवानिया तथा बनवारी लाल लवानिया, मथुरा वाले रहे। यजमान परिवार ने कथा में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके पश्चात भगवान की मंगल आरती उतारी गई और विश्व एवं लोक कल्याण, सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना की गई। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। मंदिर परिसर में जयकारों और भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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