‘भ्रमण से भ्रम मिटते हैं, सीमांत गांव देश के प्रहरी भी हैं और पहला पड़ाव भी’-प्रधानमंत्री मोदी
Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi
माइ भारत प्लेटफॉर्म के तहत 74 सीमावर्ती गांवों का अनुभव साझा करने जुटे 400 युवा, देहरादून के 6 प्रतिभागी भी शामिल
प्रधानमंत्री ने युवाओं से सीमांत क्षेत्रों की संस्कृति, प्रकृति और देशभक्ति के जज्बे को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने का किया आह्वान
देहरादून- देश की सीमाओं पर बसे गांवों को विकास की मुख्यधारा में लाने और उनकी सामरिक व सांस्कृतिक महत्ता से नई पीढ़ी को रूबरू कराने के उद्देश्य से संचालित ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2026’ के तहत एक ऐतिहासिक संवाद संपन्न हुआ। विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 सीमावर्ती गांवों का भ्रमण कर लौटे 400 से अधिक उत्साही युवाओं से सीधा संवाद किया और उनके जमीनी अनुभवों को आत्मीयता से सुना।
‘माइ भारत’ प्लेटफॉर्म के जरिए आयोजित इस राष्ट्रव्यापी पहल में 3 लाख से अधिक युवाओं ने प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भाग लिया था, जिसमें से देश भर के 403 उत्कृष्ट युवाओं का चयन हुआ। इस यात्रा में उत्तराखंड के 15 और अकेले देहरादून जिले के 06 युवाओं-शिवांग रमोला, नेहा रेवंकर, पलक पांथरी, आकांक्षा बिष्ट, संदीप नेगी एवं वरदान’ ने सीमांत जीवन की जीवंत झलक को आत्मसात किया।
‘अंतिम नहीं, देश का पहला गांव हैं सीमावर्ती क्षेत्र’
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि सरकार की सोच में अब बदलाव आ चुका है। सीमावर्ती गांव देश के अंतिम छोर नहीं, बल्कि भारत के ‘पहले गांव’ हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, ‘भ्रमण से ही मन के भ्रम मिटते हैं। हमारे सीमांत गांव भले ही दूरस्थ हों, लेकिन वहां रचने-बसने वाली देशभक्ति, अनूठी संस्कृति और समृद्ध परंपराएं पूरे देश को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सूत्र में पिरोती हैं। इन क्षेत्रों में विषम परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रनिष्ठा का जो जज्बा है, वह हर भारतवासी के लिए वंदनीय है।’ उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने अनुभवों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और सीमांत पर्यटन को बढ़ावा दें।
30 दिनों का अविस्मरणीय सफर, विकास और संवेदना का संगम
विगत 3 से 30 जून तक चले दो चरणों के इस विस्तृत भ्रमण के दौरान युवाओं ने सीमांत गांवों में पहुंच रही मूलभूत सुविधाओं ‘पक्की सड़कें, निर्बाध बिजली-पानी, सोलर लाइट, इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल बैंकिंग’ की जमीनी हकीकत को करीब से देखा। युवाओं ने प्रधानमंत्री के समक्ष अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि सीमांत क्षेत्र के निवासियों का आतिथ्य और देशभक्ति का भाव मन को छू लेने वाला था। यह यात्रा महज एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं, बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का एक भावुक और संवेदनात्मक अनुभव साबित हुई।
एनआईसी देहरादून में दिखा युवाओं का उत्साह
इस वर्चुअल संवाद के दौरान राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र देहरादून परिसर में उत्साह का माहौल रहा। कार्यक्रम में परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, राज्य निदेशक राहुल डबराल, उप निदेशक मोनिका नांदल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय सहित माइ भारत संगठन से जुड़े अनेक युवा और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने प्रधानमंत्री की इस दूरदर्शी पहल की सराहना करते हुए इसे युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने वाला अभूतपूर्व कदम बताया।

