Search for:
  • Home/
  • Breaking News/
  • दिव्यांग पति को पीठ पर बैठाकर कांवड़ यात्रा करा रही मोदीनगर की आशा

दिव्यांग पति को पीठ पर बैठाकर कांवड़ यात्रा करा रही मोदीनगर की आशा

Listen to this article

Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandi

ऐसा दौर जब पति पत्नी के रिश्तों में दरार के चलते नित नयी खौफनाक खबरें सामने आ रही हैं। तब मोदीनगर की आशा का अपने दिव्यांग पति सचिन को पीठ पर बैठाकर कांवड़ यात्रा कराना, समाज में भरोसा उत्पन्न करता है कि रिश्तों के बीच विश्वास अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मोदीनगर के बखरावा की आशा और उनके पति सचिन दूसरी बार कांवड़ लेने हरिद्वार आए हैं। पति सचिन पैरों से दिव्यांग हैं।

चल नहीं सकते तो आशा उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर कांवड़ यात्रा करा रही है। आशा और सचिन पिछले वर्ष भी कांवड़ लेने हरिद्वार आए थे। इस वर्ष दोनों फिर हरिद्वार पहुंचे हैं। उनके दोनों बच्चे भी साथ आए हैं। कांवड़ उठाने से पूर्व आशा पति सचिन को पीठ पर बैठाकर हरिद्वार के पौराणिक मंदिरों के दर्शन भी करा रही है। परिवार सहित कनखल स्थित दक्ष महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद आशा ने बताया कि हरिद्वार से गंगाजल लेकर दोनों मोदीनगर में जलाभिषेक करेंगे।

सचिन ने बताया कि भगवान शिव में उनकी गहरी आस्था है और हर साल कांवड़ लेने हरिद्वार आते थे। करीब 12 साल पहले रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से दिव्यांग हो गए। काफी इलाज और सर्जरी के बाद भी ठीक नहीं हुए और चलने फिरने में भी असमर्थ हो गए हैं। सचिन ने बताया कि पिछले साल उन्होंने कांवड़ यात्रा करने की इच्छा जतायी तो पत्नी आशा ने उनका हौसला नहीं तोड़ा और अपनी पीठ पर बैठाकर उन्हें यात्रा करायी।

सचिन का कहना है कि पत्नी के होते हुए वे दिव्यांग होने के बावजूद भी दिव्यांग नहीं हैं। पत्नी काम भी करती है और घर परिवार का भी पूरा ख्याल रखती हैं। उन्हें उम्मीद है कि भगवान शिव के आशीर्वाद से वो एक दिन स्वस्थ हो जाएंगे। आशा ने कहा कि पति पत्नी का रिश्ता आपसी विश्वास पर आधारित है। आज कलयुग के इस दौर में कुछ महिलाओं के पति की हत्या करने जैसी खबरों के आधार पर सभी स्त्रियों का मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पति धर्म का पालन करना चाहिए। उन्होंने बेहूदा रील बनाने वाली महिलाओं से भी अपील की कि ऐसा करने के बजाए अपने पति और घर परिवार पर ध्यान दें। यही भारतीय संस्कृति की पहचान है।

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required