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हरेला के दिन 16 जुलाई को मनाया जाएगा “वृक्ष दिवस”

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Kuldeep Khandelwal/ Niti Sharma/ Kaviraj Singh Chauhan/ Vineet Dhiman/ Anirudh vashisth/ Mashruf Raja / Anju Sandip

ग्लोबल वार्मिंग की सबसे गंभीर समस्या का एकमात्र समाधान है हरेला लोकपर्व

वृक्ष दिवस के रुप में मनेगी 16 जुलाई को हरेला कर्क संक्रांति

दुनिया में हर दिन कोई न कोई विशेष दिन मनाया जाता है लेकिन जीने के लिए सबसे जरूरी प्राणवायु को उत्पादित करने वाले पेड़ के नाम पर अभी तक कोई खास दिवस की न तो मान्यता मिली है और ना ही घोषणा हो पाई है। भारतीय वृक्ष न्यास ( ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया) द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष हरेला को ऐतिहासिक बनाने लिए वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति आम जनमानस को सचेत करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। हरेला के दिन 16 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय वृक्ष दिवस के रूप में मनाए जाने का जनाभियान संचालित करने का बिगुल बजा दिया है, हरेला रूपी प्रकृति पर्व को पेड़ के नाम समर्पित कराने के लिए “वर्ल्ड ट्री डे नेटवर्क” गठित कर “ग्लोबल ग्रीन पीस मिशन” के माध्यम से उत्तराखंड के लोकपर्व की पूरे देश से लेकर पूरी दुनिया तक गूंज पहुंचाई जा रही है। उक्त विचार ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष ग्रीनमैन विजयपाल बघेल द्वारा प्रैस क्लब हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान संवाददाताओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिर्वतन की सबसे बड़ी समस्या का समाधान केवल हरेला जैसा प्रकृति पर्व में ही निहित है। धरती पर वृक्षों की कमी के कारण ही पृथ्वी आग का गोला बनती जा रही है जिसे ठंडा करने के लिए अधिकाधिक पौधारोपण कार्य किया जाना और खड़े दरखतों की रक्षा करना जरूरी है। ग्रीन मैन ऑफ इंडिया के रूप में पहिचान बनाने वाले हरितऋषि विजयपाल बघेल ने आगे बताया कि प्रकृति पर्व के रुप अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से केवल दो तारीख मनाई जाती हैं जिनमें एक 14 जनवरी मकर संक्रान्ति और दूसरी 16 जुलाई कर्क संक्रांति यानी हरेला। भूमध्य रेखा के दोनों दिशाओं की जलवायु को प्रभावित करने वाली मकर रेखा और कर्क रेखा भूमंडल के बड़े हिस्से में हरित क्षेत्र बढ़ाने वाली सबसे अनुकूल तिथि 16 जुलाई ही होती है। दुनियां में वृक्षों के रोपण और पोषण के लिए 16 जूलाई सर्वोत्तम दिन होता है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 16 जुलाई को ही “वृक्ष दिवस” के रूप में मान्यता हासिल कराने का संकल्प भारतीय वृक्ष न्यास ने लिया है।

उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला को वृक्ष दिवस अभियान के रूप में हर नागरिक, हर गांव, नगर, विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, संस्थाएं व संगठन आदि तक पहुंचाया जा रहा है। हरित अभियान को देश दुनिया तक वृक्ष दिवस जन अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है, सोशल मीडिया के माध्यम से वृक्ष प्रेमियों को संगठित किया जा रहा है। क्रांतिभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार को केंद्र बनाकर वृक्ष दिवस अभियान का संचालन किया जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड से ही निकली वृक्ष सुरक्षा वाली चिपको आंदोलन की धमक ने दुनिया में धूम मचाई। अब 16 जुलाई को “वृक्ष दिवस” की मान्यता मिले उसके लिए हमने शासन प्रशासन के साथ विश्व समुदाय तक अपनी मांग पहुचाई जा रही है, सरकारों और जनसामान्य का अपार समर्थन अभियान को मिल रहा है। ऑनलाइन याचिकाओ के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र संघ तक अपना पक्ष ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया मजबूती के साथ रख रहा है। जन जागरण के लिए 6 जुलाई से जन सहभागिता के वृहद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है जो हर स्कूल और गली मुहल्ले में वृक्ष दिवस समारोह के रुप में मनाए जा रहे हैं। हरिद्वार में हर आश्रम, मठ, धार्मिक स्थल, घाट, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संस्था, औद्योगिक क्षेत्र तथा आवासीय कॉलोनी के पार्क इत्यादि स्थलों पर पौधारोपण कर “वृक्ष दिवस” मनाया जायेगा, कई तरह की प्रतियोगिताएं का आयोजन भी होना है।

पत्रकार वार्ता में भारतीय वृक्ष न्यास के संरक्षक जगदीश लाल पाहवा ने हरेला लोकपर्व-24 को वृक्ष दिवस के रुप में मनाए जाने के लिए संचालित जन की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभियान के मुख्य केंद्र हरिद्वार में 6 जुलाई से वृक्ष दिवस समारोह का शुभारम्भ होगा जो 16 सितंबर तक नियमित विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जाएगा। आयोजन समिति के जिला संयोजक प्रमोद शर्मा ने हरिद्वार में हरेला अभियान को वृक्ष दिवस अभियान बनाने के लिए तय किए जा रहे कार्यक्रमों का विवरण दिया। टीटीआई के हरिद्वार संयोजक विनोद मित्तल ने हरेला लोकपर्व को विश्व पर्व बनाने वाली प्रस्तावित योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। पत्रकार वार्ता के दौरान ओमप्रकाश सिंह, जितेंद्र रघुवंशी, रमेश उपाध्याय, राजीव भाई, महेश धीमान, डा ज्ञानप्रकाश, निवेदिता, चेतन्य गुरु, राधिका नागरथ आदि शामिल रहे।

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